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Saturday, 10 June 2017

दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा जहाँ से आती है चीखने की आवाजें | Deepest Hole Drill in the Ground on Earth


दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा जहाँ से आती है चीखने की आवाजें
दोस्तों, हम सभी ने स्कूल में धरती के इस डायग्राम को जरुर देखा होगा जिसमें धरती की अलग अलग परतों के बारे में बताया गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि खुद साइंटिस्ट भी नहीं जानते कि इन परतों के नीचे आखिर है क्या? जी हाँ, ये सच है. वैज्ञानिकों ने सिर्फ ये प्रेडिक्ट किया है कि धरती की इन परतों के नीचे कुछ ऐसे खनिज हो सकते है जिनके बारे में आज हम जानते है पर सच्चाई अभी भी हमसे दूर है.  READ OTHER MYSTERIOUS POSTS HERE इंसानों ने बनाया धरती पर नर्क का दरवाजा ...
दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा जहाँ से आती है चीखने की आवाजें
दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा जहाँ से आती है चीखने की आवाजें
एक विचित्र और रोचक बात ये है कि आज साइंटिस्ट्स स्पेस में दुसरे प्लेनेटस पर पहुँच चुके है लेकिन अपनी धरती के और धरती के नीचे के कई हिस्सों को अभी तक एक्स्प्लोर ही नहीं किया. अगर धरती पर बने आज तक के सबसे गहरे गड्ढे की बात करे तो वो है रूस का Kola Superdeep Borehole, जोकि करीब 12 किलोमीटर गहरा है. ये गड्ढा समुद्र के सबसे गहरे पॉइंट से भी ज्यादा गहरा है.

Kola Superdeep Brehole इंसानों के द्वारा बनाया एक आर्टिफिशियल गड्ढा है जो 70 के दशक में विश्वभर के देशों के बीच एक्सप्लोरेशन की जंग में बना था. दरअसल 1970 में सभी देश विज्ञान और अंतरिक्ष की खोजों में तेजी से आगे बढ़ रहे थे. वहीँ कुछ देश ऐसे थे जो धरती के नीचे के सीक्रेट्स जानने में जुटे हुए थे और एक दुसरे से आगे निकलना चाहते थे. लेकिन रूस ने जब इस गड्ढे को ड्रिल किया तो वो बाकी सभी देशों से कहीं आगे निकल गया.

Kola Superdeep Barehole का ये गड्ढा अपने आप में बहुत अमेजिंग है क्योकि इसमें ऐसे अनेक रहस्य मिले जिन्होंने इंसानों के सामने एक नयी दुनिया खोलकर रख दी. जी हाँ, जब एक्स्प्लोरर इस गड्ढे में 7 किलोमीटर नीचे पहुंचे तो उन्हें पत्थरों में पानी मिला, ये अपने आप में एक हैरान कर देने वाली डिस्कवरी है क्योकि किसी ने अंदाजा तक नहीं लगाया था कि धरती की इतनी गहराई में पानी भी मिलेगा.

सिर्फ पानी ही नयी इस गड्ढे में कुछ नए सूक्ष्मजीव भी मिले, जोकि इस गड्ढे की सबसे हैरान कर देने वाली खोजों में से एक है क्योकि इतनी गहराई में किसी लाइफफॉर्म का होना नामुमकिन था ऐसा इसलिए क्योकि धरती में जितना नीचे जाओ उतना ही टेम्परेचर बढ़ता जाता है और अधिक तापमान में लाइफफॉर्म एक्सिस्ट्स नहीं कर सकती. लेकिन वैज्ञानिकों ने जो सोचा उसका उलटा ही हुआ क्योकि इस गड्ढे में कई माइक्रोब्स मिले है जो उतने टेम्परेचर में भी सर्वाइव कर सकते थे. ये सभी माइक्रोब्स पानी में नहीं बल्कि गड्ढे की गहराई में पत्थरों में पाए गये जोकि करोड़ों साल पुराने थे.

एक और अनएक्सपेक्टेड चीज जो इस गड्ढे में हुई वो थी गैस. वैज्ञानिकों ने ये भी कभी नहीं सोचा था कि इस गड्ढे में गैस मिलेगी लेकिन वहाँ हीलियम, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसें मौजूद थी. इन सबके अलावा भी इस गड्ढे में बहुत सी कई अनएक्सपेक्टेड खोजें हुई. लेकिन अचानक ही इस गड्ढे को 1994 में बंद कर दिया गया और इसको बंद कर देने के कई कारण बताये गये. जिनमे से सबसे रोचक था  Too Hot Temperature ”.

रिसर्चरस के अनुसार इस गड्ढे के सबसे गहरे हिस्से का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस था. जोकि उनके अंदाजे से करीब दुगना था और यही वजह है कि उन्होंने इस गड्ढे को और ड्रिल करना ठीक नहीं लगा.  साथ ही इतनी गहराई में पत्थरों की डेंसिटी भी बढती जा रही थी मतलब उनकी पत्थरों को ड्रिल करने की परेशानी भी बढती जा रही थी.
Deepest Hole Drill in the Ground on Earth
Deepest Hole Drill in the Ground on Earth
इस गड्ढे को बंद करने की ये वजह तो आम जनता को बताई गयी थी लेकिन इस गड्ढे को बंद करने के कुछ राज ऐसे भी है जिन्हें पब्लिक से दूर रखा गया. जी हाँ, बहुत से लोगों का कहना है कि उस गड्ढे को इसलिए बंद कर दिया गया क्योकि रिसर्चर डरे हुए थे, उन्हें डर था कि कही वे इस गड्ढे को नर्क तक ना खोद दें. कई रिसर्चरस के अनुसार इस गड्ढे में से आवाजें भी आती थी और उनका ये भी मानना था कि वे आवाजें नरक में तड़पती आत्माओं की थी.

हो सकता है कि आपमें से बहुत से स्वर्ग नर्क और आत्माओं में विश्वास ना रखते हो लेकिन इस गड्ढे में इतनी नीचे चीखती आवाजों का आना कोई सेंस ही नहीं बनाता. वैसे इन सब बातों का कोई एक्सप्लेनेशन भी नहीं है लेकिन एक और चौका देने वाली बात ये है कि इस गड्ढे को बहुत स्ट्रिक्टली बंद किया गया है. मतलब ये जगह अब पूरी तरह से बंद है और यहाँ कोई भी विजिट तक नहीं कर सकता. साथ ही इस गड्ढे को बंद करने के साथ साथ इसे पूरी तरह से सील भी कर दिया गया था ताकि कोई दोबारा इस प्रोजेक्ट को शुरू ना कर सके.

दोस्तों इस गड्ढे के बंद होने के पीछे का रहस्य आज भी कोई नहीं सुलझा पाया है लेकिन ज्यादातर यही मानते है कि इस गड्ढे के नीचे नर्क एक्सिस्ट करता है. पर आपको क्या लगता है कि क्या धरती के इतना नीचे नर्क या कोई ऐसी जगह हो सकती है? अपनी राय नीचे कमेंट में जरुर लिखे.

तो दोस्तों ऐसी ही रहस्यमयी और चौका देने वाली जानकारियों को लगातार पाने के लिए आप हमारे साथ बने रहे और कमेंट के जरिये अपने सुझाव और विचार भी जरुर साझा करें.

Sunday, 2 April 2017

Insanon ne Banaya Dharti Par Nark ka Darvaja | इंसानों ने बनाया धरती पर नर्क का दरवाजा | Door to Hell Made by Human

इंसानों ने बनाया धरती पर नर्क का दरवाजा
दोस्तों हम सभी बचपन से ही स्वर्ग और नर्क के बारे में सुनते आ रहे है लेकिन क्या आपमें से किसी ने कभी नर्क के दरवाजे को अपनी आँखों से देखा है? अगर नहीं तो कोई बात नहीं, क्योकि आज हम आपको धरती पर मौजूद एक ऐसी जगह के बारे में बताएँगे जहाँ मौजूद है नर्क का दरवाजा.

दोस्तों धरती के कई अजूबों में से एक ये अजूबा तुर्कमेनिस्तान के दरवेजे गाँव में स्थित है जिसे सभी  Door to Hell के नाम से जानते है. दरअसल इस गाँव में 230 फीट चौड़ा और करीब 65 फीट गहरा एक क्रेटर यानि के गड्ढा है और ये गड्ढा 1971 से प्राकृतिक रूप से लगी आग से धधक रहा है. इस क्रेटर के बनने के पीछे भी एक रोचक कहानी है क्योकि इसके बनने में इंसानों का हाथ है.
इंसानों ने बनाया धरती पर नर्क का दरवाजा
इंसानों ने बनाया धरती पर नर्क का दरवाजा
कैसे बनाया इंसानों ने नर्क का दरवाजा :
1971 में तुर्कमेनिस्तान का दरवेजे गाँव एक डेजर्ट एरिया हुआ करता था और उस वक़्त सोवियत संघ के वैज्ञानिक आयल और गैस की खोज में इस एरिया में घूम रहे थे. उन्होंने दरवेजे गाँव में स्थित इस जगह को अपनी खोज के लिए चुना और यहाँ ड्रीलिंग शुरू कर दी.

ड्रीलिंग शुरू करने के कुछ देर बाद ही वहाँ की जमीन नीचे धस गयी और वहाँ 230 फीट चौड़ा व 65 फीट गहरा एक गड्ढा बन गया. वैसे इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गयी, लेकिन क्रेटर से तेजी से मीथेन गैस निकलने लगी. मीथेन गैस एक ग्रीनहाउस गैस है और जैसे ही इस गैस ने वातावरण में फैलना शुरू किया वैसे ही इसने इंसानों और वातावरण दोनों पर अपने प्रतिकूल प्रभाव दिखाने शुरू कर दिए. इसलिए जरूरी था कि तुरंत मीथेन गैस के इस रिसाव को जल्दी से जल्दी रोका जाएँ.

अब इस रिसाव को रोकने के सिर्फ 2 तरीके थे, पहला तो ये कि इस गड्ढे को दोबारा से भर दिया जाए, लेकिन इसमें बहुत सारा खर्च भी था और गड्ढे को भरने में बहुत समय भी लगता.

जबकि दूसरा तरीका था कि मीथेन गैस में आग लगा दी जाए और वैज्ञानिकों ने दूसरा तरीका अपनाना बेहतर समझा और क्रेटर को आग लगा दी गयी.
Door to Hell Made by Human
Door to Hell Made by Human
वैसे वैज्ञानिकों ने सोचा था कि कुछ ही दिनों में यहाँ की सारी मीथेन गैस खत्म हो जायेगी और ये आग खुद ही भुझ जायेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उस गड्ढे में आज भी पिछले 46 साल से उतनी ही तेज आग जल रही है जितनी पहले दिन थी. इससे ये पता चलता है कि वहाँ मीथेन गैस का कितना बड़ा भण्डार था. लेकिन जब कोई इस गड्ढे को और इसमें धधकती हुई आग को देखता है तो उस इंसान के मन में सिर्फ एक ही चीज आती है और वो है नर्क, इसीलिए इस दरवाजे को नर्क का दरवाजा / Door to Hell नाम दे दिया गया.

बन चूका है टूरिस्ट प्लेस :
वैसे तो कोई भी नर्क में नहीं जाना चाहता लेकिन तुर्कमेनिस्तान में स्थित ये नर्क का दरवाजा विश्व के सबसे फेमस टूरिस्ट प्लेस में से एक है. इस गड्ढे को देखने का अलसी मजा रात के समय ही आता है क्योकि अँधेरे में इसमें से निकलने वाली आग की लपटें, पिंघलती हुई धरती और सुनहरी आभा सभी का मन मोह भी लेती है और कईयों के मन में दहशत भी पैदा कर देती है.

तो दोस्तों ऐसी ही रहस्यमयी और चौका देने वाली जानकारियों को लगातार पाने के लिए आप हमारे साथ बने रहे और कमेंट के जरिये अपने सुझाव और विचार भी जरुर साझा करें.